Understanding the Inputs (इनपुट को समझें)
Standard Hourly Rate (मानक प्रति घंटा वेतन):
यह आपकी सामान्य प्रति घंटा मजदूरी है, जिस पर आपको नियमित काम के लिए भुगतान किया जाता है। यदि आप मासिक वेतनभोगी हैं, तो मासिक वेतन को प्रति माह अनुमानित कार्य घंटों (जैसे 26 दिन × 8 घंटे = 208 घंटे) से विभाजित कर प्रति घंटा दर निकाली जा सकती है।
Overtime Hours at Double Pay (डबल पे पर ओवरटाइम घंटे):
वे अतिरिक्त घंटे जिनमें आपने अपने सामान्य कार्य घंटों से अधिक काम किया और जिन पर कानून या कंपनी नीति के अनुसार दोगुना वेतन मिलना चाहिए—जैसे भारत के कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत 9 घंटे/दिन या 48 घंटे/सप्ताह से अधिक काम।
Formula Used (उपयोग किया गया सूत्र)
Normal Pay = Hourly Rate × Overtime Hours
Extra Pay (for 2×) = Hourly Rate × Overtime Hours
Total Overtime Pay (2×) = Hourly Rate × Overtime Hours × 2
कुल डबल ओवरटाइम = प्रति घंटा दर × ओवरटाइम घंटे × 2
Example (उदाहरण): यदि आपकी प्रति घंटा दर ₹200 है और आपने 10 घंटे ओवरटाइम किया जिस पर 2x दर लागू होती है, तो सामान्य हिस्सा = 200 × 10 = ₹2,000 और अतिरिक्त हिस्सा = ₹2,000, इसलिए कुल डबल ओवरटाइम भुगतान = ₹4,000।
Do's and Don'ts (क्या करें और क्या न करें)
Do's:
- अपने एंप्लॉयमेंट कॉन्ट्रैक्ट और कंपनी की ओवरटाइम पॉलिसी को ध्यान से पढ़ें।
- डेली/साप्ताहिक कुल काम के घंटे (नॉर्मल + OT) अपनी डायरी या ऐप में रिकॉर्ड करें।
- यदि आप फैक्ट्री एक्ट के अंतर्गत "वर्कर" की परिभाषा में आते हैं, तो सेक्शन 59 के तहत डबल वेज का अधिकार समझें।
- ओवरटाइम भुगतान को टैक्स प्लानिंग में शामिल करें—यह पूरी तरह वेतन आय की तरह कर योग्य होता है।
Don'ts:
- सिर्फ प्रिंटेड सैलरी स्लिप पर भरोसा न करें—यदि ओवरटाइम दिख नहीं रहा हो तो HR से लिखित स्पष्टीकरण लें।
- किसी भी हालत में बिना रिकॉर्ड के "कम्प-ऑफ बाद में मिल जाएगा" जैसे मौखिक वादों पर ओवरटाइम न करें।
- मान न लें कि सभी कर्मचारियों पर समान कानून लागू हैं—प्रबंधकीय/सुपरवाइजरी रोल पर अक्सर फैक्ट्री एक्ट के नियम लागू नहीं होते।
यह कैलकुलेटर केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। वास्तविक हक और भुगतान आपके राज्य के श्रम कानून, आपके रोजगार की श्रेणी (वर्कर/मैनेजेरियल) और कंपनी नीति पर निर्भर करते हैं। किसी विवाद की स्थिति में श्रम विभाग या कानूनी सलाहकार से परामर्श लें।