Understanding the Inputs (इनपुट को समझें)
Cost Price (क्रय मूल्य):
इसमें केवल खरीद मूल्य ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग, डिलीवरी, मजदूरी, किराया, बिजली, मार्केटिंग आदि जैसे indirect खर्च भी शामिल होने चाहिए ताकि असली लागत सही निकले।
Selling Price (विक्रय मूल्य):
यह वह राशि है जो आप ग्राहक से वसूलते हैं। तुलना करते समय ध्यान रखें कि सभी उत्पादों के लिए आप या तो टैक्स सहित (inclusive) या टैक्स अलग (exclusive) एक जैसा आधार ही लें।
Profit vs Loss (लाभ बनाम हानि):
यदि विक्रय मूल्य > क्रय मूल्य है तो लाभ (Profit) होता है। यदि विक्रय मूल्य < क्रय मूल्य है तो हानि (Loss) होती है। बराबर होने पर न लाभ न हानि।
Formula Used (उपयोग किया गया सूत्र)
Profit = Selling Price − Cost Price
लाभ = विक्रय मूल्य − क्रय मूल्य
Profit Margin (%) = (Profit ÷ Selling Price) × 100
लाभ मार्जिन (%) = (लाभ ÷ विक्रय मूल्य) × 100
Markup (%) = (Profit ÷ Cost Price) × 100
मार्कअप (%) = (लाभ ÷ क्रय मूल्य) × 100
Example: यदि किसी उत्पाद की लागत ₹800 है और आप उसे ₹1,000 में बेचते हैं, तो लाभ = ₹200। लाभ मार्जिन = 200 ÷ 1,000 = 20% और मार्कअप = 200 ÷ 800 = 25%।
Do's and Don'ts (क्या करें और क्या न करें)
Do's:
- क्रय मूल्य में सभी प्रत्यक्ष और परोक्ष खर्च को शामिल करें।
- तुलना करते समय सभी प्रोडक्ट के लिए टैक्स का आधार (inclusive/exclusive) एक जैसा रखें।
- लाभ मार्जिन (Selling Price पर) और मार्कअप (Cost Price पर) के अंतर को स्पष्ट समझें।
Don'ts:
- सिर्फ खरीद इनवॉइस को लागत मानकर अन्य ऑपरेटिंग खर्च को ignore न करें।
- GST सहित और GST रहित कीमतों को आपस में मिलाकर मार्जिन न निकालें।
- मार्जिन % और मार्कअप % को एक जैसा न मानें—दोनों की परिभाषा अलग है।